लोकदेवता तेजाजी पेनोरमा, खरनाल, नागौर

लोकदेवता तेजाजी पेनोरमा, खरनाल, नागौर

परियोजना का नाम: वीर तेजाजी पेनोरमा, खरनाल, नागौर

(बजट घोषणा 2014-15 पेरा संख्या 368.2.0)

वित्तीय स्वीकृति:  100.00 लाख रूपये

भौतिक प्रगति: पेनोरमा का कार्य पूर्ण हो चुका है| शीघ्र ही पेनोरमा आमजन के  दर्शनार्थ चालू किया जावेगा।

वीर तेजाजी के जीवन का संक्षिप्त परिचय

नाम:- लोकदेवता वीर तेजाजी।

पिता:- तेजाजी के पिता का नाम ताहड़ देवजी था। ये धौलिया गौत्र के जाट थे। 

माता:- इनकी माता का नाम राम कुंवरी था, जो त्योद ग्राम के दूल्हण जी सोढ़ी की पुत्री थी। 

जन्म दिनांक:- तेजाजी का जन्म माघ शुक्ल चतुर्दषी वि.सं. 1130 (सन् 1073 ई.) बृहस्पतिवार को हुआ। 

जन्म स्थान:- इनका जन्म नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ।

विवाह:- तेजाजी का विवाह पनेर के रायमल जी की बेटी पेमल से हुआ था। पेमल से विवाह होने के पूर्व तेजाजी के पांच और विवाह होने का उल्लेख मिलता है। 

निर्वाण:- नागदेवता के डंसने से तेजाजी भाद्र शुक्ला दषमी वि.सं. 1160 (सन् 1103 ई.) में देवलोक सिधार गये। 

चारित्रिक विषेषताएं:- वीर तेजाजी महापराक्रमी योद्धा, गोरक्षक, उच्च कोटि के साधक तथा चमत्कारी सिद्ध-पुरूष थे। वे प्रकृति प्रेमी, सरल स्वभाव, अहिंसा के पुजारी, त्याग, दया, वचनबद्धता और शौर्य आदि मानवीय मूल्यों के प्रणेता थे। 

सामाजिक/ आध्यात्मिक योगदान:- लोकदेवता तेजाजी के गौरक्षा हेतु शौर्यपूर्ण बलिदान एवं नागदेवता को दिये गये वचन की पालना कर, उन्होंने लोकजीवन में साहस, गौरक्षा, दया, वचन प्रतिपालन जैसे महान् गुणों की प्रतिष्ठापना की। 

जीवन की प्रमुख प्रेरणादायी/चमत्कारी घटनाएं:- तेजाजी अपनी पत्नी पेमल को लेने अपनी ससुराल पनेर गये थे। ससुराल में उनकी पत्नी की सहेली लाछां गूजरी के घर लुटेरों ने हमला कर उसका गौधन चुरा लिया। लाछां गूजरी ने गायों को छुड़ाने के लिये सबसे प्रार्थना की परन्तु कोई आगे नही आया। जब उसने तेजाजी से गायों को छुड़ाने की प्रार्थना की तो गोरक्षक और न्यायप्रिय तेजाजी गायों को छुड़ाने के लिये चल पड़े। जब वे लुटेरों का पीछा कर रहे थे तो रास्ते में एक नागदेवता ने उनको डसना चाहा। तेजाजी ने उससे कहा कि अभी तो मैं गायों को छुड़ाने जा रहा हूं। गायों को छुड़ाने के बाद में आपके समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा। नागदेवता को वचन देकर तेजाजी ने लुटेरों का पीछा किया और अपने प्राणों की बाजी लगाकर तेजाजी सभी गायों को छुड़ा लाए। सारी गायें लाछां गूजरी को सुपुर्द कर वे अपने वचन पालन हेतु नाग देवता के समक्ष उपस्थित हुए। लुटेरों से संघर्ष में तेजाजी लहू-लुहान हो गये थे। यह देखकर नाग देवता ने कहा कि मैं आपको किसी ऐसे स्थान पर डसना चाहता हूं, जहां कोई घाव न हो। तब वीर तेजाजी ने अपनी जीभ निकालकर नाग देवता के आगे कर दी। नाग देवता ने उनकी जीभ को डस लिया। नागदेवता के डसने से भाद्र शुक्ला दषमी शनिवार वि.सं. 1160 को वीर तेजाजी देवलोक सिधार गये। तेजाजी द्वारा गौरक्षा एवं वचन प्रतिपालन हेतु अपने प्राणोत्सर्ग किये जाने के कारण वे जन-जन के लोकपूज्य देवता बन गये।